12 March 2026 (recent reports)News | International


दुनिया भर में बढ़ती तेल और गैस की कीमतें अब खाद्य पदार्थों की कीमतों को भी प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऊर्जा लागत बढ़ने से खेती, भंडारण, पैकेजिंग और परिवहन की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं तक पहुँचने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ता है।कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कई उर्वरक (fertilisers) प्राकृतिक गैस से बनाए जाते हैं। इसके अलावा खेतों में सिंचाई, ट्रैक्टर और अन्य मशीनों को चलाने के लिए भी ईंधन की आवश्यकता होती है। जब तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो इन सभी प्रक्रियाओं की लागत बढ़ जाती है।खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में कोल्ड स्टोरेज और परिवहन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोल्ड स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली बिजली और रेफ्रिजरेशन सिस्टम अक्सर गैस या डीज़ल आधारित ऊर्जा पर निर्भर होते हैं। वहीं खाद्य उत्पादों को खेतों से बाजार तक पहुँचाने के लिए ट्रकों और अन्य वाहनों में ईंधन की आवश्यकता होती है।इसके अलावा प्लास्टिक पैकेजिंग, जो पेट्रोकेमिकल्स से बनती है, वह भी तेल उद्योग से जुड़ी होती है। इसलिए ऊर्जा कीमतों में वृद्धि पैकेजिंग लागत को भी बढ़ा देती है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी चरणों में बढ़ी लागत अंततः उपभोक्ताओं तक पहुँचती है, जिससे वैश्विक स्तर पर खाद्य कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है।Source: Al Jazeera
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